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बुधवार, 22 अप्रैल 2015

स्वतंत्रता दिवस


इस बार उत्तर भारत मे भीषण सूखा पड़ा था.लोग पानी-पानी के लिये तरस रहे थे.आदिवासी बहुल इलाके मे भुखमरी का आलम था. लोग काम की तलाश मे पलायन कर रहे थे.मूक पशु पानी व चारे के बिना दम तोड़ रहे थे.पंछी कही और बसेरा करने की तलाश मे उड़ गये थे. बेजान सूखे पेड़,खाली सपाट खेत पथरीले काले पत्थर वातावरण को डरावना बना रहे थे. मरे जानवरों को खाते कुत्ते और गिद्धो के झुंड यहाँ वहाँ मँडरा रहे थे.आदिवासी क्षेत्र का कुशलपुर गाँव सूखे की चपेट मे ज्यादा था. गाँव के अधिकांश लोग रोजी रोटी की जुगाड़ में गुजरात चले गये थे.प्रत्येक घर मे कुछ बच्चे और वृद्ध थे जो घर से जाने मे असमर्थ थे. शाम के लगभग 4 बजे रत्ना झोपड़ी के बाहर बैठकर सूप में धान साफ कर रही थी पास ही उसका 2 माह का बच्चा खाट पर सोया हुआ था.कल ही उसका पति कालू गुजरात से लगभग 6 माह बाद लौटा था,रत्ना को इसलिए नही ले गया था क्योकी वह गर्भवती थी.
वहाँ से मज़दूरी के पैसे इकट्ठे कर अपने बच्चो को देखने और 2-4 दिन रुककर जो साहूकार का उधार था उसे जमा कर रत्ना को अपने साथ ले जाने की कालू की योजना थी. अनायास मोटर साइकिल की आवाज सुनकर रत्ना चौंक पड़ी, उसने देखा की दो पुलिस वाले मोटर साइकिल खड़ी कर उसकी ओर बड़ रहे है. एक बड़ी बड़ी मूँछों वाला मोटा सा शायद हवलदार था और साथ मे एक सिपाही. सिपाही ने पास आकर कहा- क्यो री तेरा आदमी कहाँ है?औरत ने कहा साब वो तो खेत तरफ गया है. सिपाही बोला अरे बैठी क्या है, खड़ी हो, साब से बात कर, बता कल तेरा आदमी कहाँ था ? रत्ना बोली साब वो तो काम पर गुजरात गया था कल ही आया है और अभी खेत देखने और गाँव वालो से मिलने गया है. हवलदार ने कहाँ कि- मिलने गया है या छुपा बैठा है. सिपाही देखो साली ने घर मे ही छुपा रखा हो तलाशी लो सालों की. सिपाही घर मे घुस गया तलाशी लेता रहा बाहर निकला तो बोला साब कालू तो नही है पर 15000/- रुपया घर में से मिला है. लगता है ये उसी सेठ का है जिसकी हत्या की है. रत्ना बोली साब ये तो मेरा आदमी गुजरात से कमाई करके लाया है उसने किसी को लूटा नही है,किसी को मारा नही है, साब हम गरीब लोग है आपके हाथ जोड़ती हूँ साब हमको छोड़ दो. हवलदार बोला - चुप साली कुत्ति जुबान चलाती है तुझे मालूम है आगे रास्ते मे सेठ रामधन की लाश मिली है और उसके रुपए भी किसी ने लूट लिए है. गाँव मे कालू ही का पता लगा है जो साला कल से दारु पी रहा है और ऐश कर रहा है. उसी ने सेठ को मारकर लूटा है. रत्ना रो कर गिरगिराने लगी. इसी बीच कालू घर आया, पुलिस को देख घबराया व अज्ञात भय से वापस जाने लगा तभी सिपाही ने उसे पकड़ लिया, बोला साब ये भाग रहा था इसे पकड़ लिया है इसी ने हत्या की है साब. कालू बौखलाया खड़ा था किसकी हत्या कैसी हत्या वह समझ नही पा रहा था.तभी हवलदार ने लाठी से उसकी पिटाई शुरु कर दी. बता साले जिस हथियार से मारा था वो हथियार कहाँ है ? रुपए तो हमने बरामद कर लिए है. कालू याचना करता रहा नही साहब मैंने नही मारा, रुपये तो मै मज़दूरी करके लाया हूँ. साब मै किसी को क्यों मारुंगा,मेरी क्या दुश्मनी साब. हवलदार चिल्लाया - दुश्मनी , साले तु गुजरात गया जवान औरत को घर छोड़ गया. सेठ से लग गई होगी तूने देखा तो वार कर दिया और लूट लिया. नही साब मेरी औरत ऐसी नही है. अरे कैसी है वो तो दिख रही है. ऐसा कह कर हवलदार ने एक वहशि नजर औरत पर डाली और सिपाही से बोला ले चलो दोनो को. दोनो रोते रहे याचना करते रहे लेकिन उनकी एक न मानी. रत्ना अपने बच्चे को छाती से चिपकाए रोती खींची चली जा रही थी.साथ ही कालू को मारते हुए वे उन्हे थाने ले गए.
थाने पर सफाई हो रही थी. कल 15 अगस्त थी 61 वा स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी चल रही थी. हवलदार ने दोनो को थाने के बाहर बैठाया और थाने दार से कहा साहब रामधन के हत्यारे को ले आया हूँ और घर से 10 हजार रुपये ही बरामद किया है सिपाही ने इशारे से पूछा की 10 या 15 तो हवलदार ने सिपाही को चुप रहने का इशारा किया. और थाने दार से बोलने लगा की साहब कालू की औरत का सेठ से संबंध था कालू मज़दूरी पर गुजरात गया था कल जब कालू लौटा तो उसने उसकी औरत को सेठ के साथ पाया बस फिर क्या था कालू ने सेठ का काम तमाम कर दिया और 10 हजार रुपये लूट लिए. थानेदार ने कहा की रुपये कहा है हवलदार ने वो रुपये निकालकर दिये.फिर थानेदार ने कुटिल हँसी के साथ पूछा और सेठ की वो रखैल कहाँ है ? तो हवलदार बोला अरे साहब उसे भी लाया हूँ बड़ी मस्त चीज है.थानेदार ने कालू को भद्दी गाली देकर सिपाहीओ से धुलाई करवाई फिर थाने के एक कमरे में बंद करके पटक दिया. रत्ना थानेदार के पैरो मे गिरकर अपने पति के प्राणों की भीख मांगने लगी. थानेदार ने उसे हाथ पकड़ कर उठा लिया तथा कहा कि बच्चे को कालू को दे दे और तू सामने वाले क्वार्टर मे जाकर सफाई कर. इसी बीच सिपाही शराब की बॉटल लेकर आ गया. हवलदार व थानेदार शराब पीने लगे.थोड़ी देर मे थानेदार क्वार्टर मे गया दरवाजा बंद कर दिया अंदर से रत्ना के चिखने की आवाजे सुनाई देती रही हवलदार और सिपाही हँस- हँस कर शराब का मजा लेते रहे. आधे घंटे बाद थानेदार क्वार्टर से बाहर आया तो हवलदार क्वार्टर मे चला गया. ये सिलसिला रात भर चलता रहा.
सुबह थानेदार साहब जल्दी तैयार हो गये उन्हे स्वतंत्रता दिवस की सलामी लेना था झंडा फहराना था देश क 61 वा स्वतंत्रता दिवस था.वो जल्दी जल्दी तैयार हो रहे थे तभी कुशलपुर गाँव का चौकीदार रामलाल आया और बोला साब दगरु बदमाश पास के गाँव मे दारु पीकर मारपीट कर रहा था. लोगो ने पकड़ लिया उसके पास से 50000/- रुपये और रामधन सेठ के गले का हार भी मिला है , वह छुरा भी उसके पास है जिससे उसने हत्या की थी, लोग बैलगाड़ी मे बांधकर उसे ला रहे है. थानेदार बोला शाबाश उसे जल्दी लाओ साले को बंद कर दो.लोग दगरु को लाए थानेदार ने उसे बंद कर दिया और कालू को छोड़ा,उसकी औरत को अधमरी सी उसके साथ धकेल दी, और थानेदार बोला की ये तो गनीमत है की दगरु पकड़ा गया वरना तेरी जिंदगी खराब हो जाती चल अब जा भाग यहा से, कालू बोला साहब मेरे पैसे - तो थानेदार बोला काहे के पैसे तु क्या करोड़पति है जो घर में हजारो रुपये रखता है चला जा यहा से वरना यही सड़ता रहा जायेगा . रत्ना बच्चे को लेकर कालू का हाथ पकड़ अपनी फटी साड़ी सम्हाले उसी गाँव की बैलगाड़ी मे बैठ गयी जिसमें दगरु को लोग लाए थे.
स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा था किसी नेता का भाषण हो रहा था अब यहा किसी के साथ जुल्म नही हो सकता है हम आजाद है, अपनी रक्षा के लिए कानून है, हमारे सिपाही है,मानव आयोग है,महिला आयोग है. रत्ना ये सुन रही थी साड़ी से पेट छुपाती तो पीट दिखती और पीट छुपाती तो पेट दिखता. पास जाते बच्चे झंडे लेकर गाना गा रहे थे सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा. एक बच्चे के हाथ से झंडा उड़कर रत्ना के उपर जा गिरा रत्ना ने झंडे से अपना बदन ढका, दुर कहीं संगीत गूँज रहा था जहा डाल डाल पर सोने कि चिड़िया करती है बसेरा, और कालू रत्ना से पूछ रहा था कि हम तो लूट गये शाम को खायेंगे क्या ? तभी थानेदार की गाड़ी सलामी देकर लौटी उन्हे देख रत्ना घबराकर बेहोश हो गयी. गाड़ी धीरे धीरे कुशलपुर जा रही थी देश 61 वा स्वतंत्रता दिवस मना रहा था.
प्रेषक
मोनिका दुबे

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