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बुधवार, 22 अप्रैल 2015

जागो बेटों जागो


अब उनकी आँखों की रोशनी कम हो गई है. चेहरे पर झुर्रियों हो गई हैं बालों मे सफेदी ने घर कर लिया है.कमर झुक गई हैं. शरीर कमजोर हो गया है. मगर आज भी काँपते हाथों से अपने पोते- पोती की फरमाइश पर वो हर काम करती है. उन पर जान छिड़कती है. अपने पोपले मुँह से जब हँसती है तो लगता है कि सारी दुनिया मे सबसे खूबसूरत वही हैं.

सच कितना प्यारा रूप है उनका वात्सल्य और प्रेम से भरपूर. अपनी पुरी जिंदगी अपने बच्चों के लिये गुजार दी. पति के स्वर्गवासी होने पर पूरे घर की जिम्मेदारि निभाई.जब भी बच्चों को उनकी जरूरत थी वो हमेशा उनके साथ थी. कभी बच्चों को अकेलापन महसूस नही होने दिया.बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई. विवाह योग्य होने पर उनकी गृहस्थी बसाई और बच्चों की खुशी देखकर ही खुश होती रहीं.

आज उन्हें बच्चों के सहारे की जरूरत हैं.आज उन आँखों को एक नए चश्मे की जरूरत है.उनकी कमर दर्द करती है पर कोई सहलाने वाला नही होता. उनकों खाना खानें मे तकलीफ होती है क्योकी सारे दाँत गिर गए है पर बेटे को इतनी फुरसत कहाँ कि माँ की बत्तीसी बनवा दे.

उनसे घर के काम अब नही होते पर बेटा विदेश में है घर आने का समय नहीं. वो अकेली हैं बीमार हैं पर अपने बेटे की चिंता उन्हें अपने से ज्यादा है. अपनी धुँधली आँखों से शाम को दरवाजे को तकती है की शायद बेटा आयेगा अपनी माँ कि खबर लेने. हर फोन की घंटी सुन वो भागी चली आती हैं शायद बेटे को माँ की तकलीफ का एहसास है उसने फोन किया होगा.
मगर बेटा मगरूर हैं अपनी दुनिया मे खोया हुआ हैं. उसे माँ की तकलीफें उनका बहाना लगती है उसे वापिस बुलाने का. माँ का दर्द पराया लगता है. माँ के विचार अब आधुनिक बेटे को दकियानूसी लगते हैं. रहन सहन मिडिल क्लास लगता हैं.

जागो बेटों जागो तुम्हारी माँ तुम्हें पुकार रही हैं. अब भी समय हैं देर नही हुई. माँ का सहारा बनो उन्हें धिक्कारो मत. उनके बुढ़ापे में उनका साथ दो.उनकी दवाई का ध्यान रखो. उनका चश्मा बनवा दो. उनके लिये शॉल ले लो उन्हें ठंड लगती है. जरा देखो उनकी चप्पल कितनी घिस गई है एक नई चप्पल ले लो. उनकी बातें सुनने का भी समय निकालो. उनकी तकलीफ समझो. उनके आँसू बहने से रोक लो. उन्हें अकेले नही छोड़ो. वो माँ है हमेशा तुम्हें आशीष हि देंगी. तुम्हारी हर गलती को माफ कर देगी.

ऐसा न हों कि बहुत देर हो जाएँ. उनके जाने के बाद सबसे ज्यादा तुम हि अकेले हो जाओगे.तब बहुत सी बातें होंगी जो तुम्हें उनसे कहनी होंगी पर तब वो तुम्हारे पास नही होंगी. उनके जीते जी उन्हें खुशी दो उनका दिल मत दुखाओ. अब भी समय है जाग जाओ.अपने माँ बाप को बुढ़ापे मे अकेले न छोड़ो.

इसे पढ़कर एक भी बेटे का मन यदि मैं बदल पाई तो समझुंगी मेरा लिखना अपने मकसद मे कामयाब रहा.

प्रेषक
मोनिका दुबे (भट्ट)

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