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बुधवार, 22 अप्रैल 2015

अधूरी जिंदगी


मै बहुत खुश थी कि इक नन्हा फरिश्ता मेरी दुनिया मे आने वाला है.उसकी कल्पनाओं से मेरे कई ख्वाब सजने लगे थे. नन्हा सा फरिश्ता जब मुझे माँ कहेगा तो मेरा रोम रोम पुलकित हो जाएगा.जब वो चलेगा तो पुरा घर खुशियों से भर जाएगा.

मुझे नही पता कि तुम कैसे दिखाई देते हों.मेरे लिए तुम मेरी जिंदगी हो. मेरा हिस्सा हो. जब तुम हंसोंगे तो तुम्हारी हँसी पर अपना सब कुछ वार दूँगी. तुम्हें कभी आँसू नही बहाने दूँगी. तुम्हारे बदले मैं कुछ नही माँगती.तुम्हारा बेसब्री से इंतजार कर रही थी मै.

तुम मुझे नया जीवन दोगे. नई उमंग नया उत्साह दोंगे.तुम मेरी परछाई हो और तुम मुझसे कभी दूर नही जाओगे. मै तो यहीं ख्वाब देख रही थी . मुझे नही पता था कि परछाई भी कभी कभी अपना साथ छोड़ देती है और तुम तो मेरी कल्पना हि हो. मैं नही आना चाहती थी उस दुनिया के बाहर.

अचानक मेरा ख्वाब टूट गया. मुझे लगा कि तुम कही जा रहे हो बिना मुझे कुछ कहें. मुझे एहसास हुआ कि तुम्हारा नन्हा हाथ मेरे हाथों से छूट रहा है. मै तुम्हें रोकना चाहती हूँ पर रोक नही पाती. तुम्हें एक बार छू कर देखना चाहती थी मैं. तुम्हें जी भर प्यार करना चाहती थी मै.

मुझे लगा कि तुम मुझसे कुछ कह रहे हो.पर मै तुम्हारी आवाज नही सुन पा रही हूँ. मुझे लगा कि तुमने मुझे माँ कहा और तुम दूर बहुत दूर चले गए. मुझसे बहुत दूर. मै बहुत छतपटाई बहुत तड़पी मगर तुम्हें रोक न सकीं. तुम खो गए न जाने कौन सी दुनिया मे. और मुझे दे गए अधूरी जिंदगी. मेरी दुनिया सुनी हो गई.

सोचती हूँ तुम क्यों आए थे मेरे ख्वाबों में जब तुम्हें एक दिन चले ही जाना था. शायद मुझे जिंदगी का सबक सिखाने कि जो आता है वो जाता भी है. फिर भी मुझे तुम्हारा आज भी इंतजार हैं कभी तुम आओगे और मुझे माँ कहोंगे. मेरी अधूरी जिंदगी पूरी करोगे और मेरे जीवन का एक दाग हमेशा को मिटा दोंगे.

प्रेषक
मोनिका दुबे(भट्ट)

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